कोरना त्रासदी से कैसे होगा भारत आत्मनिर्भर भारत का निर्माण :2020

कोरना त्रासदी से कैसे होगा भारत आत्मनिर्भर भारत का निर्माण :2020 

आत्मनिर्भर भारत

 आत्मनिर्भर भारत के तथ्य


 वैसे तो माने तो  आत्मनिर्भर  भारत के कई सारे तथ्य हैं  मगर मूल रूप से कृषि खनिज जनशक्ति सामरिक सीमा राजमार्ग सस्ते ईंधन  बढ़ती हुई पेट्रोलियम मांग को कम करना आयात  आयात निर्यात पर भारत का वैश्विक स्तर पर योगदान भारत के हित में करना आत्मनिर्भर भारत के मूल तथ्य है |
 आज के समय में भारत निर्माण के तहत जनशक्ति जा रोजगार के अवसर खोकर मात्र जीवन जीने के लिए अपने पुश्तैनी घर पर पहुंच रही है वहां आने वाले समय में उद्योगों को गति मिले इसकी परिकल्पना करना बहुत ही मुश्किल है मगर भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए कोरना के रहते हुए भी जीवन को जीने और आत्मनिर्भर बनने की ओर प्रेरणा बनते रहें इसके लिए कदम उठाने पड़ेंगे |

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कोरोना त्रासदी से उबरने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम


20 दिसंबर 2019 को शुरू हुआ कौन होने का कारण आज विश्व के लगभग 98% देश इस संक्रमण पर इस महामारी से अपने मूल रूप से बिल्कुल भटक चुके हैं जिसमें वहां की अर्थव्यवस्था चौपट कर दी है जहां विश्व के कई देश आपस में बिना लेनदेन के जीवन यापन करना वहां के लोगों का मुश्किल होता था वही आज भारत को  उबरने के लिए यहां की जनशक्ति का भरपूर उपयोग कर देश को एक नई दिशा देनी होगी इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई नीतियों पर काम किया है जो करना काल में भी |

 देश की अर्थव्यवस्था को उबारने में सहायक साबित होंगे


1 कृषि किसान सम्मान निधि के तहत ₹2000 का सीधा खाते में ट्रांसफर तथा इस आदेश के 20 दिन बाद किसानों को अर्थव्यवस्था का मूलभूत स्तंभ में मानकर 4000 बढ़ा दिए गए इसे वार्षिक 6000 का अंशदान कृषि क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा दिया जायेगा
2  व्यापार  ट्रेंड आयात निर्यात
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना करने से पहले व्यापार ट्रेन को भी जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इसका भी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान है आज के युग में जहां आत्मनिर्भरता का सवाल पैदा हो रहा है वही भारत एक विश्व के लिए सबसे बड़ा वैश्विक बाजार है जो चाइना के   के जनसंख्या के क्षेत्र  दूसरा देश है वही दुनिया की लगभग  27% बाजार भारतीय बाजार को माना जाता है वही आपसे देशों में जीवन यापन एवं बहुत सारी चीजों का आदान-प्रदान बिना जीवन को जीना आज के युग में असंभव सा हो गया है


 वैश्विक व्यापार अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी है कोरना से उबरने के लिए विशेष पैकेज की आवश्यक्ता


 जहां आज के युग में व्यापार के बिना अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना कोरी परिकल्पना सी मानी जाएगी क्योंकि वैश्विक व्यापार इस तरह लोगों में घर कर गया है कि इसके बिना व्यक्ति का स्टैंडर्ड लेवल मात्र 0 साल हो जाएगा माने तो बिना पेट्रोल के भारत की परिकल्पना करना भी बहुत ही मुश्किल हो जाएगा यह भी एक व्यापार ट्रेन का हिस्सा है इस तरह कई सारे उदाहरण है जिसकी वजह से कोडना त्रासदी को बोलकर हमें इसके बीच में रहने का रास्ता अपनाना होगा वही सही रास्ता होगा जिसे हम आत्मनिर्भरता की ओर ले जायेंगे |
कोरना


अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार स्तंभ  जनशक्ति


 विश्व में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना वाह की जनशक्ति से की जा सकती है और यही आदमी जलता निर्भरता की पहचान करने में सहायक होती है क्योंकि आज जापान में 14 घंटे और 15 घंटे श्रमदान करके वहां के लोकल लोगों ने कैसे जापान को हिरोशिमा और नागासाकी के जख्मों को भी बुला दिया है उनकी मेहनत और लगन से कोरोना का तो कुछ भी नहीं हिरोशिमा और नागासाकी में हुए मानव सती और उसके दुष्परिणाम को जापानी लोगों ने अनुकूलन से बना लिया एवं अपनी जनशक्ति को पूरी जोर से अर्थव्यवस्था को उबारने में लगा दिया उसी तर्ज पर हमें आज भारतीय अर्थव्यवस्था में दूरी का पयाम आने जाने वाला जनशक्ति का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण माना जायेगा

कोरेना त्रासदी से उबरने के लिए भारत को जापान को गुरु बनाना  पड़ेगा 


 अमेरिका ने जब  जापान पर परमाणु बम गिराए तो वहां के दो सर जो वहां की वैश्विक और आर्थिक राजधानी माने जाते थे हिरोशिमा और नागासाकी वह पूरी तरह से तबाह हो गए वहां मां की जनशक्ति एवं सारी अर्थव्यवस्था है समाप्त सी हो गई इस त्रासदी से उबरने के लिए जापान की श्रम शक्ति वहां के लोगों की लगन में आज जापान को फिर से अग्रणी देशों की गिनती में लाकर रखा है वहां के लोग 12 से 14 घंटे काम कर कर देश को फिर से अग्रणी देशों की गिनती में लाकर खड़ा किया है उसी प्रकार आज भारत को सीख लेनी है और भारतीय नागरिकों को भी सीख लेनी है कि कैसे भारत को बढ़ाने के लिए आदमी देर पर मेक इन इंडिया के तहत बनी सारी चीजों को अपना नहीं है अपने दैनिक आचरण में इन चीजों को उतारना है ताकि आत्मनिर्भर के निर्माण में जनशक्ति का सही दिशा में उपयोग किया जा सके और यह लक्ष्य प्राप्त करने में ज्यादा समय न लगे

 आत्मनिर्भरता में भारत की क्षमता


 कोरोना त्रासदी के समय कोई जनहानि एवं चौपट हुई अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की क्षमता आंकने का कोई पैमाना नहीं रहा आज किसान द्वारा उगाया गया नहीं लोगों का पेट भरने का कार्य कर रहा है तो देश में निर्मित स्वदेशी वस्तु है रोजगार के अवसर बनी हुई है और कोई भी अंतर्देशीय विपणन बंद पड़ा है वैश्विक ट्रेड बंदे पड़िए

 किसी आंकने की कोई परिकल्पना नहीं रही है फिर भी सही दिशा में उठाए गए कदम और फिर से इसको खड़ा करना वहां के लोगों ए वहां की सरकारों के हाथ में होता है क्योंकि यह किसी एक देश मात्र के लिए नहीं आई है की किसी एक मात्र विशेष के लिए नहीं है इसलिए वैश्विक महामारी में आत्मनिर्भर बनना कोई बड़ी बात नहीं है 50 दिन के लोग डाउन में लोगों ने कैसे जीना है कैसे नहीं जीना है पिछले 20 साल का अनुभव एवं पुरानी चीजों का उपयोग बढ़ा दिया है इससे जल्द ही आत्मनिर्भर की ओर अग्रसर रहेंगे |

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