भारत नेपाल के संबंधों में आई तकरार janstta Bharat-Nepal

भारत नेपाल के संबंधों में  आई तकरार janstta 

भारत नेपाल संबंध के बारे में वर्तमान की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस पर विवेचना करेंगे ?

भारत नेपाल के बीच का विवाद क्या है?


  के संबंधों को मैत्रीपूर्ण संबंध में समझा जाता है लेकिन नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार की वजह से जिसका झुकाव चीन की सरकार  सरकार की ओर होने से कम्युनिस्ट सरकार की प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने वर्तमान में नेपाल के नए नक्शे  को लेकर विवाद उत्पन्न कर दिया है जिसमें नेपाल में भारतीय सीमा के लिपुलेख कालापानी दर्रे को अपनी सीमा में दर्शा कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है नेपाल का मानना है कि वह क्षेत्र नेपाली हिस्से में आते हैं जहां बरसों से भारतीय सीमा में स्थित है नेपाल में इन जगहों को लेकर अपना अधिपत्य जताया है |
                वहीं विश्व पटल में नए नक्शे को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है जो भारत और नेपाल के बीच चले आ रहे हैं सदियों के रिश्ते को तार-तार कर रहा है इसका मुख्य कारण चीनी सरकार का हस्त से कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा किया जा रहा है चीन हमेशा से ही कम्युनिस्ट पार्टियों के हित का कार्य करता है एवं उनसे भारत नेपाल रिश्तो में खटास पैदा करने का कार्य भी कम्युनिस्ट पार्टियों की जिम्मेदारी हो जाती है |
इसे लेकर वर्तमान में सीमा विवाद को लेकर काफी नेपाल ने अपने बरसों के मैत्रीपूर्ण  संबंधों को ताक में रखकर अब पूर्ण जोर से विरोध करना प्रारंभ कर दिया है

Bharat-Nepal के बीच विवाद की मुख्य वजह


 2008 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा को सुगम बनाने के लिए पिथौरागढ़ से लिपुलेख लेख तक तिब्बत को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर की सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था | इस क्षेत्र में दुर्गम पहाड़ियों की वजह से यह प्रोजेक्ट 2018 में कंप्लीट हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रोड का उद्घाटन करने के बाद ही नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर अंगुली उठाना स्टार्ट कर दिया है |
                                                                     लिपुलेख दर्रा से पिथौरागढ़ के लिए बीच में बनी यह रोड कैलाश मानसरोवर को सुगम बनाने के लिए रोड का निर्माण किया गया जोकि पूर्णता भारत का हिस्सा था और है मगर 2008 से 2015 तक नेपाल ने कभी भी विरोध का स्वर नहीं अलापा मगर 2015 से 16 के बीच में नेपाल में एक नया नक्शा जो कि नेपाल को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बनाया गया है |

 उसमें काली नदी के उद्गम क्षेत्र को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है ऐसा माने तो 1816 में हुई  सुबोली संधि के अनुसार  जब भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी हुआ करती थी तो नेपाल पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने अधिपत्य करने के लिए नेपाल के कई क्षेत्रों तक अपना क्षेत्र विस्तार किया इस समय नेपाल और भारत के बीच सुगौली संधि हुई जोकि सुपौली नामक स्थान पर हुई थी इसके  अनुसार काली नदी को दोनों देशों की सीमा का आधार बनाया गया जिसके उतरी टेट से नेपाल की सीमा को आका गया एवं दक्षिणी तट से भारतीय सीमा का आकलन किया गया इसके अनुसार नेपाल का मानना यह है कि जहां से नदी का उद्गम एवं छोटे जनों के मुहाना से नेपाल अपनी सीमा को बताने लगा है वही सुबोल इस संधि में स्पष्ट किया है कि काली नदी कोई दोनों देशों के बीच की सीमा रेखा निर्धारित किया था वही नेपाल वर्तमान में इसी बात को लेकर काली नदी के उद्गम स्थान लिपिया दर्रा को मुख्य सीमा विभाजन की रेखा मानना नेपाल चाहता है |

 भारत नेपाल के बीच विवाद कब से शुरू हुआ


प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की 2014 में सरकार बनते ही भारतीय राजनीति में ए का अद्भुत पूर्व परिवर्तन देखा गया 2015 में जब भारत में राजनीतिक नक्शा जारी किया तब से ही नेपाल विरोध का स्वर अलापना शुरू कर दिया है |
वही नेपाल ने बरसों पुराने अपने संबंधों को एक तरफ करते हुए भारत से संबंधों को खराब कर लिया है वही मानना यह है कि जब से नेपाल में कम्युनिस्ट सरकार आइए उसके बचाव में हमेशा चीन अग्रसर रहता है चीन का मानना है कि वह इस प्रकार नेपाल को भारत विरोधी स्वर अलापने के लिए मजबूर करेगा एवं इसके बदले में कम्युनिस्ट कम्युनिस्ट सरकारों को चीन सहारा देगा जिससे चीन के दौरे फायदे होंगे और जो नेपाल 30% अर्थव्यवस्था का मूलाधार भारत है कई सारी चीजों में  आयातक चीजों के तौर पर भारत पर निर्भर है वहीं चीन कूटनीति दा के कारण इन मैत्रीय व्यापारिक संबंधों को खराब कर भारत के दुश्मन देशों में एक और देश को खड़ा करना चाहता है

Bharat-Nepal के व्यापारिक संबंधों में इससे क्या प्रभाव पड़ेगा


 ऐसा माने तो नेपाल के 20 से 30 लाख लोग भारत में ही निवास करते हैं एवं अपनी रोजगार के साधन यहीं से सर्जन करते हैं नेपाली अर्थव्यवस्था में भारत का महत्वपूर्ण योगदान है वहीं भारत नेपाल को कई सारी चीजों का आयात करता है नेपाल के आयत मैं भारत का 30% हिस्सा मुख्य भूमिका निभाता है जो कि इस सीमा विवाद को लेकर काफी प्रभावित होगा 2016 में खाद्यान्न चीजों पर रोक लगाने पर में नेपाल सामान्य स्थित
 बिगड़ चुकी थी उसी को देखते हुए इस सीमा के पास से कई सारी व्यवस्थाओं में कमी आएगी एवं जो नेपाली लोग वहां के निवासी जो भारत में रोजगार के लिए आ रहे हैं उनके लिए भी काफी मशक्कत हो सकती है यदि दोनों देश मिलकर पुराने सीमा विभाजन को लेकर आम सहमति से इस विवाद को निपटा लेते हैं तो फिर से दोनों देशों की मित्रता विश्व के लिए एक मिसाल साबित होगी |

 भारत नेपाल के बीच हो रही दूरियों से चीन को कैसे फायदा


 वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक नेपाल चार बार यात्रा कर चुके हैं भारत 30 से 31 अगस्त तक दिन स्टेट्स मिलन में शामिल भी हुआ था |
 मगर नेपाल में जब से राजनीतिक नया नक्शा जारी किया है तब से दोनों देशों के बीच संबंधों में दरार आई है इससे मूल रूप से चीन को कई तरह से फायदे होने वाले हैं चीन कम्युनिस्ट सरकारों को सहारा देकर नेपाल को अपनी मर्जी के अनुसार भारत के प्रति एक्शन लेने के लिए हमेशा से कूटनीतिक प्रयास करता आया है वह प्रयास आज वर्तमान में काफी हद तक सफल भी हुआ है मगर यहां दोनों राष्ट्रों को यहां रहने वाले नागरिकों एवं सामरिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए सुगौली संधि को ध्यान में रखते हुए यदि यह सीमा विवाद हल कर लिया जाए तो ही दोनों देशों की तरक्की आपस में संभव हो पाएगी वहीं चीन चाहता है कि नेपाल आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर है ना कि भारत पर यह भारत को लेकर चीन का कूटनीतिक कदम है इस तरह की कई हरकतें चीन भविष्य में भी करेगा और भूतकाल में भी चीन ने कूटनीतिक रूप से भारत को नीचा दिखाने के लिए कोई कसर दुनिया के किसी भी स्टेज पर नहीं छोड़ी है वहीं पाकिस्तान को लेकर शिखर सम्मेलन में चीन का विरोध रहा है एवं चीन ने भारत द्वारा आतंकी घोषित के वैश्विक आतंकी अजहर को आतंकी घोषित करने में भी कई बार अंतरराष्ट्रीय मुद्दे में भारत के विपक्ष में खड़ा हुआ नजर आया है चीन हमेशा से ही भारत का धुर विरोधी माना जा रहा है वहीं आज भारत के अमेरिका के साथ बढ़ते संबंधों को देखते हुए चीन ने इस गतिविधियों को और बढ़ा दिया है ताकि चीन कूटनीतिक तरीके से भारतीय नुकसान कर सके |


 जनसत्ता ब्लॉगर के माध्यम से हम ने आज भारत नेपाल के रिश्तो के बारे में बात की Bharat-Nepal सीमा विवाद को लेकर जानकारी एवं इस सीमा विवाद को किस तरह हल किया जाए इसके लिए एक पहल की है हम हमारे ब्लॉगर के माध्यम से भारत नेपाल रिश्तो के लिए आशा करते हैं कि इसे आपसी वार्ता से ही सुला कर लिया जाए भविष्य में भी इस प्रकार की कई सारी नई जानकारी के साथ फिर से उपलब्ध होंगे आपका अपना न्यूज़ जनसत्ता |

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