कोरोना वायरस को महामारी के रूप में बदलने का मास्टर प्लान New Update 2020


कोरोना वायरस को महामारी के रूप में बदलने का मास्टर प्लान New Update 2020

 महामारी सोची समझी साजिश या इसे विकसित हो रहे देशों की विकास शैली को चौपट करने का एक मास्टर प्लान सा लगता है जिस बीमारी की औसत मृत्यु दर 0 पॉइंट एक इससे भी कम होते हुए भी इसका हुआ इस तरह बना दिया गया है की अन्य बीमारियों से इसका मृत्यु दर जिस तरह बहुत अधिक हो इसे लोगों के सामने इस तरह पेश किया है कि यह बहुत बड़ी वैश्विक बीमारी है और इसका कोई इलाज नहीं है यही सब खेल इसके इलाज न होने के पीछे रजा जा रहा है


आम से जनता को खाली यही बताया जा रहा है कि इसकी महामारी दवाई या वैक्सीन नहीं है ना कि उन्हें समझाया जा रहा है कि अन्य बीमारियों जैसे टीवी जिसकी औषध मृत्यु दर 10% से अधिक है प्रतिवर्ष भारत में इससे 500000 और विश्व में 15 लाख तक मृत्यू आंकड़ा पहुंचता है यह बीमारी टीवी से भी ज्यादा खतरनाक नहीं है फिर भी इसे मीडिया व विकसित देशों ने ऐसे पेश किया है कि मानव विश्व जगत की मानव प्रजाति खतरे में हो |

dr. TARUN KOTHARI

कोरना virus ko महामारी बदले में बदलने के लिए Rapid test का खेल

कोरोना वायरस की जांच के लिए जो Rapid test हो रहे हैं उस की विश्वसनीयता को WHO ने 34 परसेंट से 80% तक विश्वसनीय ठहराया है इस स्थिति में इस खेल को ऐसे समझा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति विश्वसनीयता के हिसाब से टेस्ट करवा दे तो यदि 80 परसेंट सही माने तो फिर भी 20% गलत रिजल्ट आना संभव है और यदि 34% विश्वसनीयता माने तो 64 प्रतिशत रिजल्ट गलत आएगा रैपिड टेस्ट के अनुसार किसी भी व्यक्ति को जो कि पॉजिटिव है
उसका यदि नेगेटिव आता है तो उसको नेगेटिव कहना गलत होगा और कोई व्यक्ति नेगेटिव है और  के कारण यदि पॉजिटिव आता है तो उसे पॉजिटिव कहना कहां तक गलत होगा
आइए हम इस खेल को इस तरह समझे खेल को समझने के लिए आपको ऊपर दिए महामारी   इस टेस्ट के एक्यूरेट टेस्ट को समझना होगा या टेस्ट पीसीआर टेस्ट किट के दर्द टेस्ट किया जाता है इसमें 30 से 40% अविश्वसनीय होने का दावा किया गया है उसी के आधार पर रिकवरी करने वाले इंसान में बी कोई अलग से को मिटने के लिए एस्ट नहीं है
यदि वह व्यक्ति किसी अन्य इंफेक्शन जोकि कोरोना के इर्द-गिर्द हो तो भी व्यक्ति क कोरोना पॉजिटिव ही बताएगा इस स्थिति में हमें यह पता लगाना मुश्किल होगा कि उसे किस प्रकार के कोरोना से ग्रसित हैं |

WHO के अनुसार Rapid test  Report  मात्र अनुसंधान के लिए उपयोग

WHO के अनुसंधान एवं अधिकारिक तौर पर Rapid test में पॉजिटिव और नेगेटिव आई व्यक्तियों को मात्र रिसर्च के लिए उपयोग किया जाएगा ना की किसी भी प्रकार की क्लीनिकल गतिविधियों के लिए इस टेस्ट को उपयुक्त नहीं बताया गया है
मात्रा और मात्र रिसर्च के लिए एवं अनुसंधान हेतु स्टेज का सहारा लिया जा रहा है
नहीं कोई गाइडलाइन जारी की है जिसके तहत Rapid test में पॉजिटिव आए व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की टेस्ट के आधार पर क्लीनिकल ट्रीटमेंट के लिए कोई गाइडलाइन नहीं है इस टेस्ट का उपयोग मात्र व्यक्ति को आईडेंटिफाई करने के लिए किया जा रहा है इससे व्यक्ति को इलाज में कोई उपयोग नहीं है

जितना ज्यादा टेस्ट उतने ही कोरना पेशेंट ओं की संख्या में इजाफा होगा

इस बात को समझने के लिए हमें समझना पड़ेगा जिस प्रकार सरकारों ने टेस्ट की गति बढ़ाई है उसी उसी गति से कोरना पॉजिटिव होगा आंकड़ा भी बढ़ता चला गया Rapid test  के अविश्वसनीय ता के कारण यदि भारत में 100 करोड लोगों का कोरोना टेस्ट होता है तो लगभग 3  पर्सेंट लोग माने तो 3 से 3:3 करोड़ लोग पॉजिटिव आएंगे इस तरह पूरा खेल इसके जांच प्रक्रिया पर टिका हुआ है और जितनी ज्यादा जांच होगी उतनी ही संख्या मैं इजाफा होगा |

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कोरोना महामारी का मृत्यु दर मात्र 0.1% या इससे भी कम फिर भी हवा क्यों

अन्य बीमारियों की तरह कोरोना महामारी  में मरने वाले की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं है एवं यह पता लगाना मुश्किल है की जो व्यक्ति की मृत्यु हुई है वह केवल कोरोना से हुई है या व्यक्ति अन्य किसी बीमारी से ग्रसित था उससे उसकी मृत्यु हुई है इस तरह इसका आंकड़ा सटीक प्राप्त करना बेहद ही मुश्किल है क्योंकि भूतकाल में जो भी मौतें हुई हैं

लगभग मरने वालों में immunity power बहुत कम था या अन्य किसी बीमारी से ग्रसित है मृत्यु तड़का आंकड़ा बहुत कम होते हुए भी इस बीमारी को हवा की तरह फैलाया गया है और लोग धर्म को ही मात्र सारा मानकर अर्थव्यवस्थाओं को चौपट किया जा रहा है यह वैश्विक साजिश का हिस्सा है हमें समझने की जरूरत है की इस से भी ज्यादा मृत्यु दर वाली कई सारी बीमारियां हैं

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पर इन पर वैश्विक विचारों वाले व्यक्तियों की प्रतिभा काम में नहीं आई इसलिए नहीं बीमारी पर इन्होंने जोर शोर से काम कर कर इसे वैश्विक आपदा या बीसवीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में नाम देकर विकसित हो रहे सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुनने के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है
आज जहां अमेरिका डिटेल WHO  बिना निस्वार्थ भावना के काम करें इसके लिए कोई बाध्यता WHO  द्वारा दी गई सभी जानकारी पर विश्वसनीयता करना भी मानवीय भूल होगी

कोराना महामारी को मीडिया ने भी बना दिया है वैश्विक महामारी

चाहे एक और पहले लगभग 20 साल पहले लोगों तक संचार क्रांति ना होने के कारण बहुत सारी बीमारियां आई और चली गई लोगों को पता तक नहीं चला पर 20 वीं सदी में संचार क्रांति ने जहां विश्व को नई गति दी है वहीं इसकी कूटनीति ता के कारण विश्व में कई सारी अप्रिय घटनाओं को भी अंजाम इसी मीडिया प्लेटफॉर्म के तहत दिया गया है
आज जहां पूरा विश्व कोरोना की महामारी में लोग डम पड़ा है वही मीडिया को भी बढ़-चढ़कर मसाला जो कि अधिक लोग देख सकें व वैश्विक साजिश करता हूं द्वारा तैयार मिल रहा है तो मीडिया क्यों पीछे रहेगा
चैनल को आगे बढ़ाने के लिए वही चैनल आज या मीडिया वही दिखा रहा है आज यहां इतने पॉजिटिव आए आज यहां इतने पॉजिटिव आए इसके मृत्यु दर का आंकड़ा नहीं बता रहा है
 और जिन लोगों की मौत हुई है वह अन्य किसी बीमारी से ग्रसित थे या नहीं थे यह आंकड़ा मीडिया के द्वारा पब्लिश नहीं किया जा रहा है क्योंकि यह पब्लिश किया जाता है तो उनके चैनल की टीआरपी घटती है इस तरह मीडिया भी एक आम इंसान के दिल और जहान में एक ही बार ठूंस रहा है कि कोरोना महामारी है

इसके अलावा यह बताने में परहेज कर रहा है कि मीडिया को रोना का मृत्यु दर अन्य सभी बीमारियों से बहुत ही कम है डरने की जरूरत नहीं है इस तरह के इंफेक्शन मानव जगत में कई बार आए और कई बार चले गए लेकिन इन्हें हवा नहीं बनाया गया क्योंकि इसका मृत्यु दर नॉर्मल सी इंफेक्शन से उत्पन्न हो रहा है एवं मृत्यु उसी कंडीशन में हो रही है कि व्यक्ति किसी अन्य बीमारी से ग्रसित हो

कोरोना को महामारी साबित करने से किन लोगों का होगा फायदा

कोरोना को यदि वैश्विक रूप से महामारी अवलोक डाउन जैसे बड़े फैसलों को मध्य नजर रखते हुए देखा है कि सबसे ज्यादा फायदा यूएस की फार्मा कंपनियों को होगा तथा WHO  की भूमिका को भी संदिग्ध ताकि श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है वहीं अमेरिका के बिल गेट्स का भी नाम दुनिया भर में छपे आर्टिकल ओं के माध्यम से बहुत से लोग बिल गेट्स की भूमिका पर भी संदेह कर रहे हैं

माना जा रहा है कि कोरोना एक फील्ड तैयार किया जा रहा है जिसके तहत फार्मा कंपनी Rapid test किट कंपनी स्वास्थ्य संबंधी बाजार निर्मित करना है जिसमें कोरोना वैक्सीन पैटर्न करा कर विवेक लोगों को इससे एक मार्केट तैयार करना है जोकि स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं में आने वाले समय में विशेष रुप से कोर्णाक पर एक अलग ही फील्ड तैयार कर पैसे कमाने का एकमात्र जरिया दिख रहा है

इसे मीडिया ने भी इस तरह बताया है कि लोग यदि वैक्सीन आता है तो मात्री इंडिया में ही इसके दुनिया का 20% कोरोना संबंधी इंस्ट्रूमेंट और फार्मा मार्केट डेवलप होगा इसका सीधा फायदा यूएस की फार्मा लॉजिस्ट कंपनियों को मिलेगा बस यह खेल चलता रहेगा जब तक कि लोग जागरूक ना हो जाए लोग जागरूक होने के बावजूद भी सभी लोगों तक यह जानकारी पहुंच पाए इसकी कोई गारंटी नहीं है

कोरोना बीमारी के बचाव में केवल और एकमात्र रास्ता क्या लोक डाउन सही है


कोरोना महामारी को देखते हुए वैश्विक स्तर पर lockdown की घोषणा वैश्विक स्तर पर सभी देश मिलकर यही रास्ता अपना रहे हैं यह कहां तक सही है की अर्थव्यवस्था के पहिए को रोक दिया जाए और लोग डाउन की स्थिति सभी देशों को प्रभावी रूप से कर दी जाए इससे लोगों में लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है जहां लोग अपने काम धंधे और रोजगार के अवसर भी छोड़कर इस महामारी में घर पर बैठकर मीडिया एवं वैश्विक साजिशकर्ता हो के साजिश में बुरी तरह फस गए

WHO की भूमिका पर संदेश कोरना महामारी को लेकर

वैश्विक महामारी के दौर में WHO  की विश्व स्वास्थ्य संगठन के नाम से प्रमुख है जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व में आई नई व पुरानी मानव प्रजाति के लिए खतरनाक बीमारियों औसत आयु वर्ग में वृद्धि का मूल उद्देश्य उन देशों को ताक में रखकर डब्ल्यूएचओ की भूमिका कोरना काल के प्रारंभ से ही संदेह की स्थिति बनी हुई है

जहां एक और विश्व में सभी न्यूज़ एजेंसी का मानना था कि प्रारंभ काल में WHO  ने चीन के साथ मिलकर इस महामारी को विश्व पटल पर प्रकट करने में देरी की वही डब्ल्यूएचओ ने कभी भी औपचारिक रूप से यह नहीं बताया कि इस बीमारी से मृत्यु दर का आंकड़ा काफी कम है तो लोग डाउन की क्यों आवश्यकता मगर डब्ल्यूएचओ भी लगता है

किसी लालच या साजिशकर्ता का हिस्सा हो सकता है क्योंकि अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए कोई भी उपयुक्त उपाय इसके द्वारा सुझाया गया नहीं है कभी भी अपने इसके Rapid test की इसके टेस्ट के आधार पर क्लीनिकल सजेशन नहीं किया है जिससे WHO की भूमिका को हमेशा से ही संदेह की स्थिति में रखा गया है इसको लेकर कई सारे हथकंडे अपना रहे हैं 

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