public and health sector बजट 2020 कुल बजट का 2.6%

Public and health sector  बजट 2020 कुल बजट का 2.6%

public and health sector ( स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ) के बजट का खेल समझे तो ठीक नहीं तो आस्था का केंद्र समझकर मान ले ?

public and health sector

 public and health sector बजट का खेल मेरी कलम से 2020 बजट के बारे में ज्यादा जानकारी ना होते हुए भी TV9 न्यूज़ चैनलों के माध्यम से चल रहे डिबेट से थोड़ा-थोड़ा तो मालूम चलता है आज इसके बारे में विवेचना करेंगे कि 2020 में पब्लिक सेक्टर को दिए गए बजट  मैं सरकार स्वास्थ्य संबंधी परिवार कल्याण संबंधी किस दिशा में काम कर रही है इसका विवेचना करेंगे |

 वैसे तो बजट public and health sector  का खेल जितना समझ में आए ठीक है वरना इसे आस्था का विषय समझकर मान लेना ही ठीक होगा क्योंकि इसके अलावा कोई चारा नहीं है


 Public Health sector  आवंटित की गई राशि



 जहां 2020 में कोरोना क्लेमेक्स चल रहा है पब्लिक health sector  सेक्टर को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है वहीं सरकार ने 2020 21 के लिए कुल बजट 3042340 करोड़ जिसमें से इस सेक्टर को 69000  करोड़ का खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है जोकि जीडीपी का 1.5% से कि काम है जिसे पिछले बजट में 65000 करोड़ का बजट था ऊपरी तौर पर देखने पर पता चलता है कि इस वर्ष बजट को बढ़ा दिया गया है मगर स्वास्थ्य क्षेत्र में 15% मुद्रास्फीति को देखते हुए यह पिछले साल से भी 5.7  % कम है कोरोना को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र मे आशा की जा रही थी थी बजट को सरकार बढ़ाकर देगी जीडीपी के एवं मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए बजट public and health sector  आवंटन किया जाएगा |


भारत नेपाल के संबंधों में  आई तकरार janstta 


भारत नेपाल संबंध के बारे में वर्तमान की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस पर विवेचना करेंगे



स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय  बजट राशि के खर्च  प्रस्तावित ( public and health sector )


 1. 69000करोड की राशि के 50% यानी 33400 करोड़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन( NHM) मैं खर्च होंगे यह कुल बजट का एक पीस दी में नहीं है  2006 -07 साथ में यह कि 75 %  फ़ीसदी था जिसे घटाकर 50% कर दिया है
2. 9016 करोड़ स्वास्थ्य निकायों  (AIIMA.ICMR) मैं आवंटित किया गया है जो कि पिछले वर्ष है 5% कम है

3. प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 6020 करोड़ आवंटित है इसमें 20 AIIMS और 21 राज्य अस्पताल  बनाने का लक्ष्य दिया लिया है |
यह समझने वाली बात यह है कि केक की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार एक AIIMS बनाने मे 820  करोड़ खर्च होते हैं इस हिसाब  से  7 AIIMS ही बनेंगे 2020 में शायद 7 AIIMS नहीं बन पाए
4.  आयुष्मान भारत के तहत 6400 करोड़ का आवंटन
5.  स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को 2100 करोड़ का आवंटन किया गया है इससे पब्लिक हेल्थ सेंटर के सारे अनुसंधान शामिल है

6.  बाकी राशि को AIDS व  (STD Control Programme)  परिवार कल्याण एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन बीमा योजना के तहत खर्च किए जाएंगे |public and health sector
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय


public and health sector को  निजी सेक्टर में लाने से  नुकसान  होगा



 2018 भारत में कुल 25778 सरकारी अस्पताल है जिनकी  विकास का भी जिम्मा NHM के जिम्मे में आता है  सरकारी अस्पतालों की हालत पहले से खस्ता  है उसमें विकास में पहले से ही ना के बराबर खर्च हो रहा है  ऐसी स्थिति में योजना  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विपरीत काम करती नजर आ रही है  |

15 वी वित्तीय  आयोग के अनुसार यह  योजना सभी लाभार्थियों को  बीमा कमर कवर दे पाती है तो इस  वर्ष 2020 का वित्तीय भार 28000 करोड से  75  हजार करोड़   का हो जाएगाजो कि 2023 में  660000 करोड से  1600000 करोड़  हो जाएगा  इसका मोटा हिस्सा निजी अस्पतालों को जाएगा  जब हमारा  कुल बजट ही  69000 करोड है तो  तो समझने की जरूरत है कि  केंद्र सरकार इसका भार कैसे उठाएगी  40 फ़ीसदी बार राज्य सरकार को  देना मुश्किल हो जाएगा  यह योजना तभी सफल हो सकती है जब लक्षित सभी लाभार्थियों को लाभ न दिया जाए | 


public and health sector  को निजी हाथों में नहीं देने के कारण


 निजी अस्पतालों के इलाज के लिए मना  भी कर सकते हैं इसका उदाहरण हमें कोरना क्राइसिस में भी मिला कोरोना क्राइसिस में लगभग सब सारा कार्यभार सरकारी अस्पतालों ने उठाया है जिससे यह समझ लेना चाहिए कि पब्लिक हेल्थ सेक्टर का विकास करना कितना महत्वपूर्ण है RT-PCR test  निजी लैब में 45 सो रुपए का है जिस पर निजी टेस्ट सेंटर 1000  का मुनाफा कमा रहे हैं  |


public and health sector  बजट के आधार पर इसकी महत्व



तेलगाना में कोराना इंफेक्शन के डर से पांच निजी अस्पतालों ने एक गर्भवती महिला के डिलीवरी के लिए इंफेक्शन के खतरे को जांच कर मना कर दिया अस्पताल में उसे डिलीवरी की गई जहां पर बच्चा मृत पैदा हुआ और कुछ ही समय में मां की भी डेट हो गई  वहीं जयपुर के जेके बिरला बा संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल तीन परसेंट ओके कोरना इंस्पेक्शन  के भय से इलाज  करने से मना कर दिया जिनकी बाद रिनल फैलियर से मौत हो गई उदाहरण तो ढेर सारे हैं |


 health and public sector निजी करण 



इसमें आयुष्मान योजना का भी योगदान है जब प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों में योजना के तहत लाभार्थी मुफ्त में इलाज करा पाएगा तो वह किसी भी प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल में इलाज के लिए नहीं जाएगा और प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल का खर्चा सरकारी अस्पताल के खर्चे से ज्यादा होगा वही इसका भुगतान आयुष्मान भारत के तहत प्राइवेट सेक्टर में पैसा चला जाएगा याद रखिएगा कोरोना क्राइसिस  में पब्लिक एंड हेल्थ सेक्टर में सबसे बड़ी भूमिका नि भाई है इसलिए इसके विकास में महत्वपूर्ण कार्य करने की आवश्यकता सरकार एवं उसके तंत्र को है |


  health and public sector कोरना काल को देखते हुए पब्लिक एंड हेल्थ सेक्टर को निजीकरण करना कहां तक ठीक ???


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